Friday, 8 June 2012

*******पराठो के पतन के कारण*********
परीक्षा के नाम पर बडे-२ धुरन्धर
मदारी के नाम ज्यूँ नाचते बंदर
इतिहास का अलग ही फलसफा
रात भर याद करो सुबह तक सफा
राम-राम करके परीक्षाहाल मे आ गया
पहला ही प्रश्न मेरे मन को लुभा गया
पूछा गया था बताओ मराठो के पतन के कारण
मैनें जल्दी में पढा पराठों के पतन के कारण
सो हाजिर जवाब की तरह लिख मारा जवाब
बचपन पराठे वाली गली में गुजरा है जनाब
धीमी-2 आँच पर पकते पराठो की महक
लतीफो चुटकुलों से गलियों की रौनक
देशी घी के आसमान छूते भाव
उपर से शुद्धता का अभाव
महगाई की मार पराठों को खा गयी
भीनी-2 गंध उसे भी भा गयी
आज तो रोटी पर भी महगाई की घात हो गयी
पराठे तो इतिहास की बात हो गयी
कोई घटना घटती नही अकारण
शायद यही रहा होगा पराठो के पतन कारण
परीक्षक ने मेरी उत्तर पुस्तिका नोबिल पुरस्कार हेतु भिजवाई
लेकिन हाय रे किस्मत अभी तक चिठ्ठी नही आई।
गोप कुमार मिश्र

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