
*******मीत गीत*****
मीत गीत पागलपन मेरा।
सांझ ढले. फिर वहींबसेरा।।
चेहरे पर चेहरा होता है
हंसता चेहरा.दिल रोता है।
पीपल पनघट कहाँ पुराने
लगता है भूतो का डेरा।। **मीत गीत. -----१
भाव उमंगें. हुई तिरोहित
अपनों में भी रहा अपरिचित।
लगता लहरों पर मांझी नें
धुंधला-२ अक्श उकेरा।। **मीत गीत. -----२
निपट अकेला. क्यूं डरता है
मोत से पहले क्यूं मरता है
देख अमावस निशापटल पर
किरण लिख रही नया सवेरा।। **मीत गीत. -----३
गोप कुमार मिश्र
मीत गीत पागलपन मेरा।
सांझ ढले. फिर वहींबसेरा।।
चेहरे पर चेहरा होता है
हंसता चेहरा.दिल रोता है।
पीपल पनघट कहाँ पुराने
लगता है भूतो का डेरा।। **मीत गीत. -----१
भाव उमंगें. हुई तिरोहित
अपनों में भी रहा अपरिचित।
लगता लहरों पर मांझी नें
धुंधला-२ अक्श उकेरा।। **मीत गीत. -----२
निपट अकेला. क्यूं डरता है
मोत से पहले क्यूं मरता है
देख अमावस निशापटल पर
किरण लिख रही नया सवेरा।। **मीत गीत. -----३
गोप कुमार मिश्र
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