संवाद
स्मृतियों के समंदर मे
उठा भावनाओ का ज्वार
और पटल पर छोड गया
वेदनाओं की रेत रूपी चुभन
चेतना शून्य मनोकाश से
एक खनकती आवाज आयी
क्या कहा मेरा नाम
माँ मै अजन्मा अनाम
आपके प्यार की पहली प्रतिकृति
निराकार बन न सकी आकृति
यहाँ यक्ष प्रश्नों की भीड खडी है
लोग कहते है
वहाँ अजन्मी या जन्मते ही मारी जाती लडकियाँ
तभी तो यहाँ अच्छी तादाद में लडकियाँ
पर तुम तो थे लडके
माँ क्या कहूँ मै सबसे
आपके महत्वाकाक्षी भविष्य का सवाल
बनकर मेरा महाकाल
यहाँ सभी क्षत विक्षत लूले लंगडे काने
सहसहुं मुख नहि जाहि बखानें
मैतो फिर भी खुशनशीब हूँ
अपनें बहन भाई के समीप हूँ
दोनों आधे अधूरे कमजोर
मै तो गया आपकी इच्छा से
वे असमय गये भाग्येच्छा से
आपको गमगीन देखा आ गया
सांत्वना की जगह अपने ही गम गा गया
अब भाई बहन जाग जायेंगे
मुझे न पाकर कोहराम मचाएंगें
माँ अलविदा कह आवाज दूर चली जाती है
माँ चीखती चिल्लाती चेतनाशून्य हो जाती है
गोप कुमार मिश्र
स्मृतियों के समंदर मे
उठा भावनाओ का ज्वार
और पटल पर छोड गया
वेदनाओं की रेत रूपी चुभन
चेतना शून्य मनोकाश से
एक खनकती आवाज आयी
क्या कहा मेरा नाम
माँ मै अजन्मा अनाम
आपके प्यार की पहली प्रतिकृति
निराकार बन न सकी आकृति
यहाँ यक्ष प्रश्नों की भीड खडी है
लोग कहते है
वहाँ अजन्मी या जन्मते ही मारी जाती लडकियाँ
तभी तो यहाँ अच्छी तादाद में लडकियाँ
पर तुम तो थे लडके
माँ क्या कहूँ मै सबसे
आपके महत्वाकाक्षी भविष्य का सवाल
बनकर मेरा महाकाल
यहाँ सभी क्षत विक्षत लूले लंगडे काने
सहसहुं मुख नहि जाहि बखानें
मैतो फिर भी खुशनशीब हूँ
अपनें बहन भाई के समीप हूँ
दोनों आधे अधूरे कमजोर
मै तो गया आपकी इच्छा से
वे असमय गये भाग्येच्छा से
आपको गमगीन देखा आ गया
सांत्वना की जगह अपने ही गम गा गया
अब भाई बहन जाग जायेंगे
मुझे न पाकर कोहराम मचाएंगें
माँ अलविदा कह आवाज दूर चली जाती है
माँ चीखती चिल्लाती चेतनाशून्य हो जाती है
गोप कुमार मिश्र

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