मन मौन की भाषा************
प्राणवायु का चैतन्य तत्व मन है
तटस्थ है पर साक्ष्य है
मन में एषणाओ का आना
मन का मनुष्य होना है
एषणा माने इच्छा
इच्छाओ से विचार तथा भावना आती है
हम उसीको मन समझ लेते है
जब कि वह तो मन का बिम्ब मात्र है
अर्थात मनुष्य यदि इच्छा रहित हो जाय
फिर कोई भावना नही यानि निष्काम भाव
कोई विचारनही यानि विचार शून्य
शेष बचता विशुद्ध चैतन्य तत्व मन
अर्थात मन की भाषा मौन
उपरोक्त विचार कबीर एवम् फरीद मिलन प्रसंग से प्रेरित है अतः
श्री चरणों में समर्पित
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