Saturday, 2 June 2012

सूत्रधार
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जीवन का इतना ही सार।
है समय बडा ही सूत्रधार।।

सुख दुख दोनों डोली अर्थी
कन्धे मिलते चल पडे चार १

कौडी- कौडी माया जोडी
डोली खाली ले चल कहार २

जग रंगमंच हम कठपुतली
अनदिखे हाथ अनदिखे तार ३

गोपियां लूटली भीलों नें
अर्जुन भूले करना प्रहार ४

मदहोश गोप अब होश कहाँ
जब हुईं पिया से नजर चार ५
गोप कुमार मिश्र

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